Old Age Couple | Romantic Love Story In Hindi | New Love Story in Hindi

दोस्तों यह कहानी एक जोड़े की है जो बूढ़े हो चुके हैं और आज भी दोनों में बहुत प्यार है, Love Story In Hindi आपको प्यार के असली एहसास से रूबरू कराएगी और इससे आप सीखोगी की प्यार क्या होता है Romantic Love Story In Hindi 

 

Old Age Couple | Romantic Love Story In Hindi | New Love Story in Hindi

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मै अपने काँधे पर एक झोला टांगे हुए अपने छाते की मदद से बारिश की बूंदों से बचता हुआ धीरे धीरे चलकर उस लवर पॉइंट पर रखी एक बैंच पर जा बैठता हूँ। अपने काँधे से झोला उतार कर अपने बगल में संभाल कर रख देता हूँ।

बारिश की हलकी हलकी बुँदे मेरे जिस्म में एक अजीब सी ठिठुरन पैदा कर रही थी, मैने अपना छाता वापस फोल्ड करके उसी बैंच के किनारे पर रख दिया और अपनी आंखों पर लगा नज़र का चश्मा उतार कर आसमान की तरफ देखने लगा।

बारिश की हलकी हलकी बुँदे मेरी आँखों को ठंडक पहुंचा रही थी।

 

विजय, विजय…. अचानक ही मेरा ध्यान उस आवाज की तरफ चला गया जो लगातार मेरा नाम पुकारे जा रही थी, वो आवाज मेरी पत्नी सोना की थी।

 

सोना–विजय भीग क्यों रहे हो, बीमार हो जाओगे, अब पहले जैसे जवान नहीं रहे आप 74 साल के हो चुके हो।

 

मै–लेकिन मुझे तो आप अब भी वैसी ही दिखती हो जैसी पहले थी, बस आपको मै ही बूढ़ा लगने लगा हूँ।

 

सोना–कुछ तो शर्म करो 70 पार कर चुकी हु मै लेकिन फिर भी आपके सर पर प्यार का भूत चढ़ा हुआ है।

 

मैने सोना का हाथ अपने हाथों मे ले लिया वो आज भी किसी कमसिन लड़की की तरह शर्मा रही थी, ओर अपना हाथ छुडाते हुए बोली

 

सोना–क्या करते हो कोई देखेगा तो क्या सोचेग, अब हमारी उम्र नहीं है ऐसे हाथों मे हाथ डालकर रखने की आपका बुढ़ापा तो आने का नाम ही नहीं ले रहा।

 

मै– हम दोनों को कितने साल हो गए यहाँ आते हुए ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात है। आप अपनी सहेलियों के साथ यहाँ घूमने आयी और हमारी मुलाक़ात हो गयी, आज की का दिन तो था वो पूरे 53 साल बीत गए उसके अगले ही दिन मैंने अपने परिवार वालों को आपके घर रिश्ता लेकर भेज दिया था

 

सोना– आँखों से शुरू हुआ वो प्यार जल्दी ही एक परिवार में बदल गया, अच्छा एक बात बताओ अभी हफ्ते भर पहले आप किस छिपकली से बात कर रहे थे फ़ोन पर, ओर मुझे देखते ही जल्दी से फ़ोन कट कर दिया।

 

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मै– कोनसी छिपकली, मै नहीं करता किसी छिपकली से बात कुछ तो मेरी उम्र का लिहाज करो।

 

सोना– अच्छा बहुत होशियार बन रहे हो जल्दी से बताओ किस से बात कर रहे थे वरना आपके बचे खुचे दांत भी तोड़कर आपके हाथ में दे दूंगी।

 

मै– अरे यार आप भी बस तिल का ताड़ बना देती हो, वो फ़ोन बीमा कंपनी वालो का था।

 

सोना– वालो का नहीं वाली का था, साफ़ साफ़ क्यों नहीं कहते के किसी लड़की से बात कर रहे थे

 

मै– यार बूढ़ा हो गया हूँ अब तो मुझ पर शक करना बंद करदो

 

सोना– बूढ़ा तो बंदर भी होता है, लेकिन गुलाटियां मारना बंद नहीं करता।

 

मै–अच्छा अब मैं बन्दर हो गया, ओर आप कौन हो बांदरी।

 

सोना– हा हा हा, अब तो मै आपको बांदरी ही लगूंगी, छिपकली जो मिल गयी है आपको।

 

मै– यार सोना प्लीज अब ज्यादा हो रहा है, मैने बस आपको प्यार किया है, ना आपके अलावा कोई आया है मेरे जीवन में और ना कोई आएगा। एक ही बात आप हर आधे घंटे में मुझसे बलवा देती हो।

 

सोना– आप से ना बुलवाऊं तो क्या किसी और से बुलवाऊं? आप कभी खुद तो कहते नहीं कि प्यार करते हो, बस आपको गुस्सा दिला कर ही आपसे बुलवाना पड़ता है।

 

मै–ठीक है अब तो अपने मन की कर ली ना आपने।

 

सोना इस बार मेरे हाथ पकड़कर अपने चहरे से लगा लेती है।।।

 

सोना– देखो ना कितनी झुर्रिया पड़ गयी है, आप किसी ना किसी बहाने से मेरा चेहरा पहले छू ही लिया करते थे और जब मै आपको अपनी आँखें दिखाती थी तब कैसे आप अपना चेहरा बिगाड़ लेते थे। जैसे किसी बच्चे से उसकी चॉकलेट छीन ली हो।

 

मै– और नहीं तो क्या? आपको भी मुझे तंग करने मै बड़ा मज़ा आता था, जब देखो मुझसे दूर ही भागा करती थी।।।

 

सोना– आप तो शुरू से बेसब्र रहे हो, ना वक़्त देखते थे ना ये देखते थे कोई और भी रहता है हमारे साथ घर में आप मुझे अपनी आँखों से एक पल के लिए भी दूर नहीं होने देते थे।

 

मै– और अब इस उम्र में आकर आप मुझे पता नहीं किन किन छिपकलियों के साथ फसा रही हो।

 

सोना– क्या करूँ डर लगता है की आप को खो ना दु, इसीलिये हर वक़्त ऐसा इसलिए कहती रहती हूँ ताकि आप कही कुछ गलत ना कर दो, ओर आपको ये भी याद दिलाती रहती थी की मेरी नज़रें बस आप पर हे है।

 

मै–इतना प्यार करती हो तुम मुझसे, फिर क्यों दूर चली गयी तुम मुझसे।

 

सोना–दूर कहा गयी हूँ, आपके पास ही तो हूँ, आप सच मे पुरे पागल हो, देखो ना कितना हसीं मौसम हो रहा है। इस दिन आज पहली बार में बारिश देख रही हु वरना यहाँ तो बैठने की जगह ही नहीं मिलती है।

 

मै– लेकिन हम बस हमेशा इसी बेंच पर ही बैठे है आज तो चाय वाले की दुकान भी बंद है वरना ऐसी बारिश में गरम गरम चाय पीने का मजा कुछ और ही है।

 

सोना– क्या आपको याद है जब हम पहली बार यहाँ शादी के बाद आए थे?

 

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मै– हा याद है, क्यो क्या हुआ था उस दिन??

सोना– सच मै विजय आप बूढ़े हो गए हो, याद नहीं है उन दोनों कबूतर कबूतरी ने क्या कहा था।

मै–क्या कहा था?? कौन कबूतर और कौन क़बूतरी।

सोना– वो लड़का उस लड़की से बोल नहीं रहा था उस वक़्त हमारे लिए के दोनों की शादी हो गयी है फिर भी रूम में होने की बजाए हम यहाँ पहाड़ पर चढ़े हुए है।

मै– अच्छा वो, हा याद आ गया, आपने उसे जवाब भी तो दिया था वापस। वो क्या था???

सोना– सच में आप बूढ़े भुलक्कड़ हो,  जाओ मै आपसे बात नहीं करती, जब मेरी बातें ही याद नहीं रहती तो फिर मुझसे शादी क्यों की।

मै– अरे यार आप फिर से नाराज़ हो गयी, अच्छा मुझसे उस दिन के बारे में कुछ भी पूछ लो मै सब बता दूंगा।

 

सोना– मुझे सब पता है, जितना आप भोले बनने की कोशिश कर रहे हो। उतने भोले आप हो नहीं, इसलिए अपनी ये होशियारी किसी छिपकली पर चलाना मुझ पर नहीं, आपकी रग रग से वाकिफ हू मै।

 

मै– फिर छिपकली क्या जान अब तो सुधर जाओ

 

सोना– सुधरना आपको हे मिस्टर शर्मा, और अब छिपकली को गोली मारो और ये बताओ मेरी चॉकलेट और रेड रोज़ कहा है। वैलेंटाइन डे का मेरा गिफ्ट कहा है??

 

मै– मुझे माफ़ कर देना इस बार में वो सब नहीं ला पाया।

 

सोना– झूठ आप पक्का मेरे लिए कुछ ना कुछ लाए हो, मै मान ही नहीं सकती आप आज के दिन खाली हाथ आए हो।

 

मै–सच में जान इस बार मै चाह कर भी कुछ ला ही नहीं पाया, हालत ही कुछ ऐसे बन गए थे के मै कुछ ला ही नहीं पाया।

 

सोना– तो फिर आपके झोले में क्या है?

 

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मै– कुछ नहीं है जान….

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सोना– मुझे देखना है दिखाओ मुझे, अगर मेरे लिए कुछ नहीं लाए हो तो मुझे दिखाओ कोनसी छिपकली के लिए गिफ्ट डालकर घूम रहे हो तुम्हारे इस झोले में।

 

मै–सोना प्लीज मान जा। क्यो तंग कर रही हो मुझे?

सोना– दिखाओ मुझे क्या है इसमे जो इसे दबोच के बैठे हो।

 

मै– ये है इसमे, लो कर लो तसल्लि (मै लगभग चिल्लाते हुए बोला)

 

मैने उस झोले में से एक छोटी मटकी निकाली जिस को लाल कपड़े से ढका गया था, वो दिखाते हुए, मेरी आँखों में से आँसू निकलने लगे जो जाने कितनी देर से मै रोके बेठा था, मै अपना सर पकड़ कर जोर जोर से रोने लगा। बस रोते रोते लगातार यही कहे जा रहा था। आप क्यों गयी मुझे छोडकर, आप क्यों गयी?

 

सोना मेरे सर पर प्यार से अपना हाथ फेरते हुए बोली, मै कहा आपको छोड़कर गयी हु, मै तो यहाँ दो दिन से बस आपका ही इंतेज़ार कर रही थी।

 

मै– लेकिन आप मुझे वहां अकेला छोड़कर अकेली क्यों गयी,  मुझे भी अपने साथ ले चलती।

 

सोना– जान मैने मेरी बिमारी से आपको तील तील करते टूटते हुए देखा है, मै अपने प्यार को इस तरह तड़पता हुआ नहीं देख सकती थी, इस्लिये मुझे वहां से जाना पड़ा।

 

मै– लेकिन आप मुझे अपने साथ भी ले जा सकती थी, अकेले क्यों गयी। ये नहीं सोचा आपके बिना मेरा क्या हाल हुआ होगा। ये नहीं सोचा आपके बगैर जियूँगा कैसे?

 

सोना– इसीलिए तो मै आपका यहाँ इंतेज़ार कर रही थी, बहुत दिन हो गए बीमारियों से जूझते जूझते। लेकिन अब और नही जैसे ही हम फिर से एक हो जाएंगे, तुम्हारी सोना फिर से जवान हो जाएगी और तुम्हारी सोना को मेरा प्यारा सा विजय फिर से मिल जाएगा।

 

अब आओ ना 2 दिन आपके बिन, जल बिन मछली की तरह तड़पी हु मै।

 

सोना अपने कदम धीरे धीरे बढ़ाते हुए खाई की तरफ जा रही थी बारिश की वजह से वहाँ काफी कोहरा भी हो गया था।

 

मै– सोना मुझसे दूर मत जाओ, ये देखो मैंने इस लेटर में भी लिख दिया है की मेरी भी अस्थिया यही पहाड़ों में बिखेर दी जाए मेरे लिए रुको जान।

 

मै अपने पास पड़ा वो अस्थि कलश उठा कर वह फैली वादियों में सोना की अस्थियां बिखेरने लगता हु, ओर बढ़ चलता हु अपने प्यार का हाथ थामने। बढ़ चलता हु फिर से उस हाथ को थामने के लिए जो अब दुबारा कभी मेरे हाथों से नहीं छूटेगा, मेरी जान मेरी सोना मेरे प्यार का हाथ थामने आगे बढ़ता ही चला जाता हूँ।

 

सोना का हाथ थामते ही मेरा शरीर फिर से पहले जैसा हो चूका था, हमारा प्यार अमर हो चुका था, ना अब एक दूसरे को खोने का डर, ओर ना ही समाज का कोई बंधन।

 

मेरे सामने सोना फिर से खूबसूरती की मिसाल बन कर खड़ी थी, चेहरे पर मासूमियत आँखो मे नज़ाक़त भरी। बारिश की वो बुँदे हमारा श्रृंगार कर रही थी, उन बूंदो में दो प्यार करने वाले पंछियों की तरह कलरव करते हुए आसमान की गहराई में जाते  चले गए।

 

हमारा प्यार जीत चूका था हर दर्द से हर तकलीफ से बस एक जिस्म पड़ा था पहाड़ी के नीचे और उसके पास फैली सोना की अस्थियां।

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