जलन पर शायरी: दोस्तों वैसे तो हमें किसी से भी किसी बात पर जलना नहीं चाहिए इससे किसी का कुछ नहीं जाता इससे हम खुद को ही नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन फिर भी कुछ लोग यह बात नहीं समझते और हमसे जलते रहते हैं जो कि बिल्कुल गलत है।
इस लिए आज हम “जलन पर शायरी” लेकर आए हैं जिसको आप अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाकर अपने जलने वालों को दिखा सकते हो और उन्हें बता सकते हो के हमसे जलने से अच्छा कुछ कर लो ज़िन्दगी में काम आएगा।
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जलन पर शायरी | Jalan Shayari In Hindi
मंजिलें पहाड़ों से ऊंची हो गयी
इंसान की सोच जो छोटी हो गयी है
क्योंकि इंसान अपनों से ही जलता है
और दूसरों पर वो मरता है
Manzilein pahadon se uchi ho gayi
Insan ki soch jo chhoti ho gayi hai
Kyonki insan apno se hi jalta hai
Aur dusron par woh marta hai
ज़ख्मों पर मेरे नमक छिड़क कर
चर्चा ए मोहब्बत तूने शरेआम किया है
दर्द ए जलन ही अब दवा है मेरी
मिर्ची ए इश्क़ जो तूने पेश किया है
Zakhmo par mere namak chhidak kar
Charcha Ae mohabbat tune sareaam kiya hai
Dard Ae Jalan hi ab dawaa hai meri
Mirchi Ae Ishq jo tune pesh kiya hai
जलन तो होती है मुझे उस चाँद को देखकर
जो हर रात अपनी चाँदनी के साथ ही बिताता है
Jalan toh hoti hai mujhe us chand ko dekh kar
Jo har waqt raat apni chandni ke saath hi bitaata hai
वह हार कर भी जीत गया क्योंकि उसके पास
सदैव मुस्कुराने की कला थी और कोई जीतकर
भी रोज़ हारता है क्योंकि उसके पास जलने के
सिवाए कोई कला ना थी
Woh haar kar bhi jeet gaya kyunki uske paas
Sadev muskurane ki kala thi aur koi jeet kar
Bhi roz haarta hai kyun uske paas jalne ke
Sivaye koi kala nahi thi
इश्क़ की जलती लो मैं
सुलगती आशिक़ी काफिर
जलन की बात ना पूछ
रूह बेचैन है सुलग जाने को
Ishq ki jalti lo main
Sulgati aashiqi kafir
Jalan ki baat naa puchh
Rooh bechain hai sulag jane ko
दूसरों की तरक्की पर जलने वाले इंसान
जलन की आग में कहीं मिटा ना लेना
अपना ही नाम ओ निशान
Dosron ki taraki par jalne wale insan
Jalan ki aag mein kahi mitaa naa lena
Apna hi naam o nishaan
कोई फ़क़ीर कल मुझे इतनी गर्मी का राज़ बता गया
आँखें तो नम थी पर चेहरे पर हँसी थी
हँसते हँसते कह गया “जव इंसान ही इंसान से जलने लगा है तो गर्मी तो पड़नी ही है ना साहेब”।।।
Koi fakeer kal mujhe itni garmi ka raaz bata gaya
Aankhein toh nam thi par chehre par hassi thi
Haste haste keh gaya “jab insan hu insan se jalne laga hai toh garmi toh padni hi hai naa saheb”
आखिर दिल की बात जुबान पे आ ही गयी
तेरी आँखों मे प्यार आज दिख ही गया
तेरी जुबान कितना भी इनकार करे
तेरी जलन ने राज दिल के खोल ही दिए
Aakhir dil ki baat jubaan pe aa hi gayi
Teri aankhon mein pyar aaj dikh hi gaya
Teri zuban kitna bhi inkar kare
Teri jalan ne raaz dil ke khol hi diye
चाँद को भी जलन में पीछे पीछे आते देखा है
माँ जब सँवरती है तो आईना बन नीचे आते देखा है
Chand ko bhi jalan mein peeche peeche aate dekha hai
Maa jab sanwarti hai toh aaina ban neeche aate dekha hai
पहले लोग आपसे आकर्षित होंगे
फिर वो आपसे मिलने चाहेंगे
आपको जानना चाहेंगे
और जब धीरे धीरे जान लेंगे
तब उनका वही आकर्षण
जलन और नफरत में बदल जाएगा
Pehle logg aapse akarshit honge
Fir woh aapse milne chahenge
Aapko janana chahenge
Aur jab dheere dheere jaan lenge
Tab unka saathi akarshan
Jalan aur nafrat mein badal jayega
क्यों लोग जमाने के लगाते हैं नज़र
कर नहीं सकते जो खुद कुछ
देख के जल जाते हैं किसी को मुकाम पर
नहीं भाते मुझे ऐसे लोग बिल्कुल ही
नहीं समझ आते हैं मुझे ऐसे ही यह लोग
Kyun logg zamane ke lagate hai nazar
Kar nahi sakte jo khud kuch
Dekh ke jal jaate hai kisi ko mukam par
Nahi bhaate mujhe aise logg bilkul hi
Nahi samjh aate hai mujhe aie hi yeh logg
Jalan Shayari 2 Lines
तुम नफरत करो बेशुमार
लोग कुछ नहीं कहेंगे
हमने ज़रा प्यार कर लिया
तो सो तूफान खड़े हो गए
Tum nafrat karo beshumar
Logg kuch nahi kahenge
Humne zara pyar kar liya
Toh so tufan khade ho gaye
इंसान की यही फितरत है
कभी नफरत तो कभी शिकायत है
कहाँ कोई खुश रहता है ज़िन्दगी में
कहीं जलन तो कही नफ़रत है
Insan ki yeh fitrat hai
Kabhi nafrat toh kabhi shikayat hai
Kaha koi khush rehta hai zindagi mein
Kahi jalan toh kahi nafrat hai
जो तुम इतना जलते हो ना मुझसे
पक्की बात है के एक दिन बुझ जाओगे
Jo tum itna jalte ho na mujhse
Pakki baat hai ke ek din bujh jaoge
ना जाने वो क्यों मुझसे जलता है
दिल में क्या है क्यों नहीं कहता है
सुलगता हुआ कोयला धुंआ करता है
साथ हवा का हो तो धुँ धुँ कर जलता है
Naa jane woh kyun mujhse jalta hai
Dil mein kya hai kyun nahi kehta hai
Sulgata hua koyla dhua karta hai
Saath hawa ka ho toh dhua dhua kar jalta hai
अक्सर खामोशी खुद को ही जलाती है
जब भी बात आत्मसम्मान की आती है
Aksar khamoshi khud ko hi jalati hai
Jab bhi baat aatam samaan ki aati hai
दोस्तों हम उम्मीद करते हैं के यह शायरी आपको जरूर पसंद आई होगी हमें कमेंट कर इसके बारे में जरूर बताना की Jalan Shayari आपको कैसी लगी और ऐसी शायरी के लिए आप हमारे ब्लॉग Loyal Shayar के साथ जुड़े रहिए। धन्यवाद?